Sunday, January 22, 2012

अपने परिवेश को हरा भरा रखने का एक प्रयास किया जा रहा है। शुरुआत अपने घर के आँगन से की जा रही है। यह प्रयास जरी रहेगा। राम बरन यादव , निशा यादव और प्रदीप चतुर्वेदी द्वारा यही प्रयास किया जा रहा है। एस प्रयास सतत जरी रहेगा। प्रकृति संरक्षण हम सब का दायित्व है।
An effor has been made to keep our environment green. Beginning is being done from courtyard. This effort will be continue. This effort is initiated by Ram Baran Yadav, Nisha Yadav and Pradeep Chaturvedi and the same will be continue. To save nature is duty of all. Lets be active in this field.

Saturday, July 16, 2011

SAMBHAVANAON KE DWAR KA VIMOCHAN




On 7th July, 2011 My new book 'SAMBHAVANAON KE DWAR' in Hindi launched by senior Officials of BPCL Shri K.H. Subramanium, GM (Retail), WR, Shri Sandeep Kalra, AMM (MP& CG), Shri Raman Malik, TM (Retail), Indore. On the occasion there were more than 200 Literature liking people were present. Famous Singer of Indore Ms. Aakanksha Jachak and BPCL TM Bhopal Shri Manoj Kakde Anchored the programme. The theme of the book is around "Possibilities are hidden, there is need to explore the opportunities."

Thursday, May 5, 2011

SAMBHAVANAO KE DWAR



संभावनाओ के द्वार :



संभावनाएं छुपी होती हैं आवश्यकता होती है उन्हें साकार करने की। जीवन का हर दिन एक अवसर लेकर आता है। कुछ लोग अवसर को पहचान कर उस अवसर को जीवन का लक्ष्य बनाकर उस पथ पर चल देते हैं और सफलता प्राप्त कर लेते हैं। संभावनाओं के द्वार बुक में ऐसा ही बहुत कुछ प्रेरणादायक लिखा है जो हर उम्र के लोगों को अवसर की राह दिखानें में सक्षम है। बच्चे, बड़े, युवा, विद्यार्थी, प्रोफेसनल, नौकरीपेशा लोग , व्यापारी, बेरोजगारों आदि इसे पढ़कर लाभान्वित होंगे।

Friday, April 8, 2011

RAM BARAN YADAV


RAM BARAN YADAV


OFF AND ON WHEN I STAND ON A HILL,

VIEW AND VISION OF EARTH THRILL,

EMPTYNESS OF MY HEART BEGINS TO FILL,

MY CONSCIOUS EVOKES MY ETERNAL HILL.

08.04.2011 NIGHT 11.15PM


Tuesday, March 29, 2011

सम्मान



आदरणीय माखनलाल चतुर्वेदी तथा किशोर कुमार की नगरी खंडवा के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ० जगदीश चौरे जी के द्वारा सम्मानित होने से मन में हिंदी साहित्य के वर्तमान स्वरुप को नए ढंग से संवारने की ललक मन में जगी है। गद्य एवं पद्य दोनों विधाओं में नूतन प्रयोग करने की आवश्यकता है।

मुस्कान हमारी






मुस्कान हमारी साथ चलेगी,

जीवन, आजीवन भर,

तुम यूँ ही मुस्कराते रहना,

संग संग मेरे जीवन भर।

खुशियाँ भर कर अपनी अंजलि में,

मैं सदा लुटाऊंगा तुम पर,

तुम अपनी अंजलि मुझ पर,

कभी ना करना न्योछावर मुझ पर।

Monday, September 20, 2010

मन की मनीषा का विमोचन

१५ सितम्बर, २०१० का दिन एक स्मरणीय दिन बन गया। मेरे द्वारा लिखी किताब "किस राह मुझे जाना है "तथा काव्य संग्रह "मन की मनीषा " का विमोचन माननीय श्री संदीप कालरा जी के द्वारा किया गया। श्री कालरा साहब स्वयं कवी एवं साहित्य प्रेमी हैं। उनके मन के भाव बहुत सहज एवं सरल होते हुए भी बहुत गहरे एवं गूढ़ होते हैं। इस अवसर पर माननीय श्री रमण मलिक साहब, एस वी सावंत साहब तथा बी पी सी एल के अन्य कई अधिकारी गन उपस्थित थे।